Mulnivasi Mela



On the occasion of 

 189tBirthday of Rashtrapita Jyotirao Phule and 125th Birthday of Rastranirmata Babasahab Dr. B. R. Ambedkar 11th to 14th April 2016


Dear Mulnivasi Bahujan Brothers and Sisters,

Birthdays of our liberators –Rashtrapita J yotirao Phule and Rastranirmata Babasahab Dr.B.R.A mbedkar are indeed great occasions to be remembered and cherished. Regrettably our society over the years reduced these occasions to celebrations of pomp and frolic expressing their adoration and reverence to these great personalities. Not surprisingly, the B.J .P along with Sangh Parivar and Congress, with ulterior motives and vying with each other to win over the followers of Dr.A mbedkar, have embarked upon their grandiose programmes celebrating his 125th J ayanti this year, erecting statues and memorials.

BAMCEF and its Offshoot organisation Mulnivasi Sangh, for the past eight years have been organising Mulnivasi Melas during 11th and 14th A pril to drive in three pertinent aspects in our society- a) T o establish Phuley-Ambedkarite ideology throughout India. b) T o penetrate Mulnivasi identity among SC/ST /OBCs and converted Minorities as it is very vital to the dignity and plane of survival to the oppressed majority. c) T o generate human and financial resources for continuing the movement of our forefathers.

Revolution through Constitution

The Constitution of India is hailed world over as the perfect document to usher in democratic revolution without bloodshed. If one ponders over the greatest achievement of Babasahab Dr B.R.Ambedkar, it is to create a democratic arrangement through which Liberty, Equality, Fraternity and Justice are to be catered to every citizen of the country as against present Brahminical social order based on inequality and injustice which provides special privileges to miniscule minority of Brahmin, Bania and relegate powerlessness and servitude to the vast

Majority of Sudra-Atisudra original inhabitants of India. Democracy is under Attack

If we look at the present socio-political situation of the country it is noticed that the Brahminical forces are hell bent upon to destroy democratic institutions which our forefathers have built laboriously through the constitution. T he secular voice of  the  Mulnivasi SC/ST /OBC’ s and converted minorities is being chocked if it is not to the liking of the ruling castes. T he recent case of Rohit V emula in the University of Hyderabad is a live example. T hey are trying to destroy our secular nation into a theocratic State. T he Backward class of Citizens are not given their due representation in the Executive and the J udiciary although the constitution specifically provides in the fundamental rights. T he economic policies are framed in such a manner that the wealth of the nation and means of production are concentrated in the hands of the miniscule Brahmin-Banias contrary to A rt. 39 of the constitution. Farmers’ suicide has become almost an everyday affair and still the government of the day is not ploughing any money in the A griculture sector. On the contrary huge tax reliefs are provided to the corporate sector in the name of development. T he Supreme Court of India rightly observed on 6th February 2016 that court cannot be expected to watch quietly from the sidelines if ‘ democracy is slaughtered’ .

 Friends, Phule-A mbedkarite ideology and movement are the perfect antidote to the Brahminical ideology. T he relentless struggles by our forefathers have been to pull down the Brahminical Social Order and establish democratic society based on the principles of liberty, equality, fraternity and justice. A t this juncture, it is imperative for us to recall the birthday message of Babasahab Dr.B.R. A mbedkar –“I want an assurance of different kind. A n assurance to stand for our rights, fight for our rights and never return until we win our rights”. BA MCEF and Mulnivasi Sangh are the nation-wide organisation operating under the Phule- A mbedkarite ideology in order to uproot Brahminism-the spirit of inequality and secure liberty, equality and justice to the Mulnivasi Bahujans in their mother land.

We therefore request you to support Mulnivasi Melas Nation-wide with your time, talent, participation and donating liberally as a part of our social responsibility in order to defend and take ahead the democratic movement of our forefathers to its logical end.


Jai Bhim                                       Jai Mulnivasi                                                           Jai Bharat

Yours in Mission

B.D. Borkar 

National General Secretary                                                   

P.D. Satya Pal

National President



राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुलेके 189वें एवं

राष्ट्रनिर्माताबाबासाहेब डा बी आर आंबेडकरके 125वें

जन्मदिन के संयुक्त अवसर पर राष्ट्रव्यापी मूलनिवासी मेला

दिनांक 11 अप्रैल 2016 से 14 अप्रैल 2016 तक


प्रियमूलनिवासी बहुजन भाइयों और बहनों,

            हमारे मुक्तिदाता - राष्ट्रपिताज्योतिबा फुले एवं राष्ट्रनिर्माताबाबासाहेब डा बी आर आंबेडकर का जन्मदिन हमारे लिए वास्तव में एक महान अवसर है जब हम उन्हे याद करें, उनके विचारो का प्रचार–प्रसार करे और उनके मिसन को हासिल करने का संकल्प लें। परंतु अफसोस कि पिछले कुछ वर्षों मेंहमारे समाज के कुछ लोगो ने इन महापुरुषों के मिसन एवं विचारधारा को दरकिनार कर इन अवसरों को,केवल धूमधाम और उल्लास से मनाकर, इसे इनमहान हस्तियों की आराधना और श्रद्धा व्यक्त करने तक केवल सीमित कर दिया है। जो अपने को केवल महापुरुषों की जयंती मनाने तक सीमित रखते है,ऐसे ही अम्बेडकर के अनुयायियों का दिल जीतने के लिए संघ परिवार के साथ बीजेपी एवं कांग्रेस एक दूसरे के साथ होड़ करके,गुप्त इरादों के साथबाबा साहब अंबेडकर की 125वीं जयंती मनाने का भव्य कार्यक्रम प्रारम्भ कर दिया हैऔर उनकी मूर्तियों और स्मारकों के निर्माण पर अमल शुरू कर दिया है। परंतु जहा एक तरफ शासक जातियाँ दिखावे के लिए बाबासाहेब डा आंबेडकर का जन्मदिन मना रही है वहीं दूसरी तरफ पूरी ताकत से फुले-अंबेडकर-पेरियार के विचारधारा पर कार्य करने वाले संगठनो, कार्यकर्ताओ और अनुयायियों का उत्पीड़न कर रही है। इससे स्पष्ट होता है कि इनको फुले-अंबेडकर की विचार धारा से कुछ भी लेना देना नही है बल्कि इनका उद्देश्य मूर्ति पर माला एवं बिचारो पर ताला है।

मूलनिवासी मेला क्यो? :-  बामसेफ और इसकी ऑफशूट संगठन मूलनिवासीसंघ, पिछले आठ वर्षों सेपूरे भारत भर में 11 से लेकर 14 अप्रैल तक मूलनिवासी मेलों का आयोजन अपने समाज के तीन महत्वपूर्ण पहलुओं पर ज़ोर देकर कर रहा है।

(a) सम्पूर्ण भारत मे फुले-अम्बेडकरी विचारधाराको समाज मे स्थापित करना (b) अन्य पिछड़े वर्ग, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जन जाति एवं इनसे धर्म परिवर्तित अल्पसंख्यक समाज मे मूलनिवासी पहचान कायम करना क्योकि यह शोसित एवं शासित समाज के गरिमा और अस्तित्व के के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। (c) हमारे पूर्वजो के आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी मानव एवं वित्तीय संसाधनो का निर्माण करना।

               संविधान के माध्यम से क्रांति बिनारक्तपात केलोकतांत्रिक क्रांति का मार्ग प्रशस्त करने वाले सटीक दस्तावेज़ के रूप मे भारत के संविधान की दुनिया भर मेंप्रसंशा की जाती है। यदि कोई बाबा साहबडॉ अम्बेडकर की सबसे बड़ी उपलब्धि पर विचार करता है, तो यह असमानता और अन्याय पर आधारित ब्राह्मणवादी सामाजिक व्यवस्था जो ब्राह्मण-क्षत्री-वैश्य, अल्पसंख्यक वर्ग को तो विशेषाधिकार प्रदान करती है जबकिशूद्र-अतिशूद्रबहुसंख्यक वर्ग अर्थातभारत के मूल निवासी बहुजनोंको बेबसी और दासता की तरफ ले जाती है, को नकार कर एक लोकतांत्रिक व्यवस्था का निर्माण करना है जिसके माध्यम से स्वतंत्रता, समानता, भाईचारा और न्याय देश के हर नागरिक को उपलब्ध हो।इसलिए मूलनिवासी संघ व्यवस्था परिवर्तन के उद्देश्य के लिए मूलनिवासी बहुजन समाज का साथ एवं सहयोग लेकर संविधान केमाध्यम से क्रांति के लिए कटिबद्ध है।

लोकतंत्र खतरे मे :- अगर हम देश की वर्तमानसामाजिक-राजनीतिक स्थिति को देखे तो पाते है की ब्राह्मण वादी ताक़तें,सभी लोकतान्त्रिक संस्थाओ को जिन्हे हमारे पूर्वजो ने कठीन परिश्रम से संबिधान के माध्यम से निर्मित किया था, को तहस नहस करने पर तुली हुयी है। अन्य पिछड़े वर्ग, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जन जाति एवं इनसे धर्म परिवर्तित अल्पसंख्यक अर्थात मूलनिवासी बहुजन समाज की धर्मनिरपेक्ष आवाज यदि शासक जतियों को पसंद नहीं है तो सरकारी संस्थाओ का प्रयोग कर इसका गलाघोटा जा रहा है।हैदराबादकेंद्रीय विश्वविद्यालय में घटितअंबेडकर स्टूडेंट एसोसियासन के रोहित वेमुला का मामला और आईआईटी चेन्नई मे फुले-अंबेडकर-पेरियार स्टडी सर्किल पर प्रतिबंध इस बात का एक जीवित उदाहरण है। वे हमारे धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र को नष्ट करके ब्राह्मणवादी विचारधारा पर आधारित एक धार्मिक राज्य बनाने की कोशिश कर रहे हैं। भारत के सुप्रीम कोर्ट ने 6 फरवरी 2016 को ठीक राय व्यक्त किया कि यदि देश में लोकतन्त्र की हत्या होती है तो उनसे यह उम्मीद नही रखनी चाहिए कि वे इसे एक कोने मे बैठ कर चुप चाप देखते रहेंगे।

संबिधान दिवस की आड़ मे संबिधान से छेड़-छाड़ :- शासक जातियाँएक तरफ दिखावे के लिए संबिधान दिवस मना रही है तो दूसरी तरफ संबिधान से छेड़-छाड़ कर रही है। संबिधान मे जनप्रतिनिधियों के लिए मिनिमम या मैक्सिमम किसी भी शिक्षा का जिक्र नहीं है। हरियाणा और राजस्थान मे भी भारतीय संबिधान लागू है इस लिए हरियाणा और राजस्थान सरकार द्वारा संबिधान से अलग हटकर पंचायत प्रतिनिधियों के लिए मिनिमम शिक्षा का नियम बनाना पूरी तरह से असंबैधानिक कदम है। मूलभूत और उच्च शिक्षा संस्थानो मे मूलनिवासी विद्यार्थियों को शिक्षा लेने से वंचित किया जा रहा है और उनके साथ भेद- भाव हो रहा है। पिछड़े वर्ग के नागरिकों को न्यायपालिका,कार्यपालिका, सरकारी सेवाओं एवं प्रोनत्ति मे समुचित प्रतिनिधित्व नहीं दिया जा रहा है, जब किसंविधान इसे विशेष रूप से मौलिक अधिकार के रूप मे पिछड़े वर्ग के नागरिकों कोसमुचित प्रतिनिधित्व प्रदान करता है।संबिधान के अनुच्छेद 39 के बिलकुल विपरीत इस तरह की आर्थिक नीतियों बनाई जा रही जिससे राष्ट्र की सम्पदा और उत्पादन के साधन ब्राह्मण-बनिया अल्पसंख्यक वर्ग के हाथो मे केन्द्रित होता जा रहा है।किसानो की आत्म हत्या हर एक रोज की खबर बन गई है इसके वावजूद भी वर्तमान केंद्र सरकार कृषि क्षेत्र मे पैसा नही लगा रही है। इसके विपरीत विकास के नाम पर कारपोरेट सैक्टर को भारी कर राहतें दी जा रही है। दोस्तो, फुले-अम्बेडकरी विचारधारा एवं मूलनिवासी बहुजन आंदोलन ब्राह्मणवाद रूपी सामाजिक बीमारी का सटीक इलाज है। गैर-बराबरी पर आधारित ब्राह्मणवादी सामाजिक व्यवस्था को हटा कर स्वतंत्रता, समानता, भाईचारा और न्याय पर आधारित लोकतांत्रिक सामाजिक व्यवस्था के निर्माण के लिए हमारे पूर्वजो ने अथक संघर्ष किया है। इस संबंध मे बाबा साहेब का अपने अनुयायियों को अपने  जन्मदिन पर दिये गये संदेश को याद करना अत्यंत महत्वपूर्ण होगा। बाबा साहब ने कहा था कि,मै अलग तरह का आश्वासन चाहता हूँ। अपने अधिकारो के लिए खड़े होने का,अधिकारो के लिए लड़ने का और जब तक अधिकार जीत न ले तब तक वापस नहीं लौटने, का आश्वासन।”

       ब्राह्मणवादजो कि गैर-बराबरी की भावना है, को जड़ सहित उखाड़ कर मूलनिवासी बहुजन समाज को उनके मातृ भूमि मे स्वतंत्रता, समानता, भाईचारा और न्याय हासिल कराने के लिए राष्ट्रव्यापी संगठन बामसेफ एवं मूलनिवासी संघ फुले-अम्बेडकरी विचारधारा के तहतकार्य कर रहें है।मूलनिवासी  मेला इसी आंदोलन की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। देश के सभी जिलो मे लगने वाले राष्ट्र व्यापी मूलनिवासी मेला मे इस वर्ष प्रबोधन का विषय है,डा अंबेडकर की 125वीं जयंती के आड़ मे बीजेपी एवं कांग्रेस का संबिधान पर हमलाइसलिए हम आप से अनुरोध करते है कि आप अपने सामाजिक उत्तरदायित्व के तहत मूलनिवासी मेलों मे अपना समय,प्रतिभा, उदारतापूर्वक दान देकर एवं इनमे भागीदारी के साथ मूलनिवासी मेलोंका सहयोग एवं समर्थन करें जिससे कि हम अपने पूर्वजो के लोकतान्त्रिक आंदोलन की रक्षा कर सके और उसे आगे तार्किक अंत तक ले जा सके।

जय भीम…!  जय मूलनिवासी….!!   जय भारत……!!!
मिशन में आपका

       बी डी बोरकर   डॉ पी डी सत्यपाल
       राष्ट्रीय महासचिव      राष्ट्रीय अध्यक्ष



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